LYRIC

यहोवा चरवाहा मेरा
कोई घटी मुझे नहीं है
हरी चराइयों में मुझे
स्नेह से चराता वह है

मृत्यु के अंधकार से
मैं जो जाता था
प्रभु यीशु करुणा से
तसल्ली मुझे दी है

शत्राुओं के सामने
मेज को बिछाता हैे
प्रभु ने जो तैयार की
मन मेरा मगन है

सिर पर वह तेल मला है
अभिषेक मुझे किया है
दिल मेरा भर गया है
और उमड़ भी रहा है

सर्वदा प्रभु के घर में
करूँगा निवास जो मैं
करुणा भलाई भी उसकी
आनन्दित मुझे करती है।

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